لَا يَرْقُبُونَ فِى مُؤْمِنٍ إِلًّا وَلَا ذِمَّةً وَأُو۟لَٰٓئِكَ هُمُ ٱلْمُعْتَدُونَ
Hindi Translation - Azizul Haq Al-Omariवे किसी ईमान वाले के बारे में न किसी रिश्तेदारी का सम्मान करते हैं और न किसी वचन का, और यही लोग सीमाओं का उल्लंघन करने वाले हैं।